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निवेदन हे कि वार्शिक साधारन सभा रविवार दिनान्क 09/10/2011 को सुबह 10:00 बजे दी हिन्दुस्तान चेम्बेर्स,कालबा देवी रोड मे आयोजित की जा रही हे।
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संपर्क - शा.शान्तीलाल मन्नाजी शोभावत (+91 98202 08325)
वर्षीय योजना
श्री महावीर स्वामी केवलज्ञान कल्याणक भव्य पंच वर्षीय योजना शाहीकरबा, सुबह नवकारशी, सुबह-शाम लापसी दर वर्षीय 25 हजार रु एवं पांच वर्ष का -1,25,000/- साधार्मिक का लाभ में 25 नाम लेने व पत्रिका में तीन नाम, गोत्र, गॉव आयेगा।
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श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाऊस (छात्रावास) - परिचय
एक समय था जब इस (सुमेरपुर) क्षेत्र में एक मात्र हाईस्कूल था फलत: आस पास के अनेकों गावों में रहने वाले विद्यार्थियों को विद्याध्ययन के लिए सुमेरपुर आना पडता था। उन दिनो विद्यार्थियों के रहने की बडी समस्या थी। इस समस्या समाधान हेतु लगभग 75 वर्ष हुए जैन बंधुओं ने आपसी सहयोग से छात्रावास का निर्माण कराया ताकि जैन विद्यार्थी यहाँ रह कर अध्ययन कर सके। परिणाम यह हुआ कि बहुत बडी संख्या में विद्यार्थी यहाँ रह कर जैनाचार के हिसाब से अपने जीवन का पालन कर हाईस्कूल की पढाई भी करते थे। यहां से अध्ययन कर गए अनेक छात्रों ने व्यापार के क्षेत्र में नाम कमाया तो कई छात्रो नें शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन हुए जिनके मानस पटल पर आज भी छात्रावास के जीवन की स्मृतियाँ तरोताजा है।
उद्देश्य :
सुमेरपुर - शिवगंज समृद्ध व्यापारी नगर, स्वास्थ्यकर जलवायु, उपजाऊ भूमि, जवाई नदी के मनोरम तट, दो व्यापार मंडियों की उपस्थिति से खान-पान सामग्री सम्बन्धी अधिकाधिक सुविधाओं को मद्दे नजर रखते हुए सर्व प्रथम पावा निवासी शाह ताराचन्द्रजी मेघराजजी के मस्तिष्क में विचार आया कि क्यों नहीं यहाँ (सुमेरपुर) जैन छात्रालय की स्थापना की जाए ताकि आस पडौस के गावों से विद्यार्थी यहां रहकर विद्याध्ययन कर सके। अंत मे आपने मास्टर भीखमचन्द्रजी एंव समाज के प्रतिष्ठितजनों की सहायता से विक्रम संवत 1991 मिगसर कृ्ष्णा पंचमी को श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाऊस के नाम से छात्रालय शुभ मुहुर्त में स्थापित की। आज तक इस छात्रालय की छत्र छाया में रहकर चरित्र, स्वास्थ्य, अनुशासन का पाठ पढकर सेकडों छात्र व्यवहारिक एवं धार्मिक विद्या प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन हुए तो अनेकों ने व्यापार के क्षैत्र में नाम कमाया जिनके मानस पटल पर आज भी छात्रावास के जीवन की स्मृतियाँ तरोताजा हे।
महत्व व उपयोगिता :
श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाउस का अत्यधिक महत्व रहा है जिसे निम्न बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है।
1. विद्याध्ययन का केन्द्र :
सुमेरपुर नगर में एक मात्र हाईस्कूल होने के कारण उस समय के आस पास के छोटे छोटे गाँवो के अनेकों जैन विद्यार्थी यहाँ रहकर अध्यन कर सके व अपने जीवन को उज्वल बना सके।
2. श्री पोरवाड - संघ सभा :
गोडवाड - अडतालीस आदि प्रांतो में बसने वाले प्राग्वाट ब़धुओं (पोरवाल) की यह सभा थी। जिसमे जाति मे प्रचलित कुरीतियों, बुरे रिवाजों तथा उत्पन्न हुए पारिवारिक झगडो का निर्णय प्रति वर्ष होने वाले अधिवेशन मे लिया जाता था। इस सभा का कार्यालय भी "श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाऊस", सुमेरपुर में ही रखा गया था।
3. प्राग्वाट जातीय इतिहास तैयार करवाना:
विक्रम संवत 2001 माघ कुष्णा 4 को यहीं पर हुए पोरवाल संघ सभा के सभा का द्वितीय अधिवेशन में प्राग्वाट जाति का इतिहास लिखाने बाबत समिती का गठन किया गया जिसका कार्यालय भी श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाऊस में रखा गया।
4. प्राग्वाट इतिहास :
प्राग्वाट इतिहास के लेखक श्री दौलत सिंह जी लोढा द्वारा प्राग्वाट जातीय इतिहास का अधिकांश भाग श्री वर्धमान जैन बोर्डिग हाउस में 06 अप्रेल सन 1946 से 06 नवंबर 1950 तक गृहपति के पद पर रहते हुए लिखा गया । समय ने करवट ली गांव-गांव विद्यालय खुल गए जैन बंधु भी व्यापार हेतु अन्य प्रांतो में चले गये परिणाम छात्रों की अत्यधिक न्युनता से छात्रावास को आराधना गृह (वृद्धाश्रम) में परिवर्तित कर दिया गया।
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