श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाउस
एक समय था जब इस (सुमेरपुर) क्षेत्र में एक मात्र हाईस्कूल था फलत: आस पास के अनेकों गावों में रहने वाले विध्यार्थियों को विध्याध्ययन के लिए सुमेरपुर आना पडता था। उन दिनो विध्यार्थियों के रहने की बडी समस्या थी। इस समस्या समाधान हेतु लगभग 80 वर्ष हुए जैन बंधुओं ने आपसी सहयोग से छात्रावास का निर्माण कराया ताकि जैन विध्यार्थी यहां रह कर अध्ययन कर सके। परिणाम यह हुआ कि बहुत बदी संख्या में विध्यार्थी यहां रह कर जैनाचार के हिसाब से अपने जीवन का पालन कर हाईस्कूल की पढाई भी करते थे। यहां से पढ कर गए अनेक छात्रों ने व्यापार के क्षेत्र में बहुत प्रगती की तो कई उच्च पढासीन हुए जिनके मानस पटल पर आज भी छात्रावास के जीवन की स्म्रूतियां तरोताजा है। समय ने करवतट ली, गांव गांव विध्यालय खुल गए तथा जैन बंधु भी व्यापार के सिलसिले में राजस्थान से बाहर अन्य प्रांतों में चले गए। धिरे धिरे जैन बोर्डिंग हाउस (छात्रावास) में छात्रों की संख्या कम होते होते समाप्त हो गई। फिर जैन समाज ने छात्रावास को अराधना ग्रह (व्रूद्धाश्रम) में परिवर्तीत करने का निर्णय लिया। अराधना ग्रह (व्रूद्धाश्रम): यहां आध्यात्म के क्षेत्र में आगे बढने वाले जो अपना संध्याकाल प्रभू भक्ती में ही साधना करते हुए व्यतीत करना चाहते है, अथवा समय के सताए या परिवार में निभाव न होने के कारण या एकाकी जीवन से परेशान जैन स्त्री-पुरुषों मे लिए आश्रम की व्यवस्थ चल रही है। यहां अराधकों के लिए डा़क्तर, दवाएं, कपडे, चाय-दूध, नास्ता, भोजन, ठंडे व गर्म पानी की व्यवस्था, नाई, धोबी, सफाई कर्मचारी के साथ साथ पुरुष व महिलओं के लिए अलग अलग रहने के लिए स्वच्छ हवा दार कमरें व पारिवारिक वातावरण मे रहने की अति उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है। इसी श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाउस (छात्रावास) के विशाल परिसर में बन रहा है, 21वीं सदी का धर्म व सांस्क्रुतिक मुल्यों से सरोबार "श्री अभिनव महावीर धाम"