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निवेदन हे कि वार्शिक साधारन सभा रविवार दिनान्क 09/10/2011 को सुबह 10:00 बजे दी हिन्दुस्तान चेम्बेर्स,कालबा देवी रोड मे आयोजित की जा रही हे। आजीवन सदस्यता आवेदन पत्र (Download Form)
संपर्क - शा.शान्तीलाल मन्नाजी शोभावत (+91 98202 08325)

वर्षीय योजना
श्री महावीर स्वामी केवलज्ञान कल्याणक भव्य पंच वर्षीय योजना शाहीकरबा, सुबह नवकारशी, सुबह-शाम लापसी दर वर्षीय 25 हजार रु एवं पांच वर्ष का -1,25,000/- साधार्मिक का लाभ में 25 नाम लेने व पत्रिका में तीन नाम, गोत्र, गॉव आयेगा।




 
 
श्री अभिनव महावीर धाम (संचालक: श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाऊस-छात्रावास, सुमेरपुर)
राजस्थान के पाली व सिरोही जिला मुख्यालयों के मध्य सुमेरपुर नगर में राष्ट्रीय राज मार्ग नं. 14 पर स्थित श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाऊस (छात्रावास) के परिसर में निर्मित जैन धर्म के विश्व कल्याणकारी सिद्धांतो को जन-जन तक पहुँचाने वाला विराट ज्ञान तीर्थ...

प्रेरक :

परम पूज्य 278 दीक्षा दानेश्वरी परम शासन प्रभावक आचार्य देव श्री वि.गुणरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब व युवा प्रवचनकार आचार्य देव श्री वि.रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब।

श्री वर्धमान जैन बोर्डिंग हाउस ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारीयों के साथ वार्तालाप के दौरान, जैन समाज और जैन युवा पीढी को जैन धर्म के मुल्यों से परिचित कराने के उद्देश्य से आचार्य देव श्री वि.गुणरत्न सूरीश्वरजी म.सा. और आचार्य देव श्री वि.रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा. ने परिवर्तन करने की प्रेरणा दी। इस गुरु वाणी से प्रेरित ट्रस्ट मंडल नें वहीं पर श्री अभिनव महावीर धाम बनाने का संकल्प ले लिया।
आचार्य देव श्री वि.गुणरत्न सूरीश्वरजी म.सा. युवा प्रवचनकार आचार्य देव श्री वि.रश्मिरत्न सूरीश्वरजी म.सा.  

श्री अभिनव महावीर धाम का उद्देश्य :

भोगवाद और भौतिकवाद की चकाचौध में आज का मानव व्यस्त होने के बावजुद सुख का कही़ अता-पता नजर नहीं आ रहा है। इंसान लाख कौशिश के बावजूद स्वयं को बौना महसूस कर रहा है। जीवन में व्याप्त लक्ष्यहीन दिशाविहीन दशा उसे संतप्त कर रही है। विज्ञान के विमान को उडने व उतरने के लिये विमानतल की आवश्यकता होती है, वैसे मानव को जन्म से मोक्ष प्रप्ति के लिये धर्म की धरा अत्यधिक जरुरी है। विश्व के मानचित्र पर अनंतानंत तीर्थकरों ने मात्र मानव को ही विश्व के तमाम छोटे बडे जीवों का कल्याण करने के लिये अहिंसा, संयम और तप धर्म से प्रकाशित किया। चौबिसवें तीर्थकर भगवान महावीर ने शासन स्थापना कर आचार में अहिंसा, विचार में अनेकांत और व्यवहार में कर्मवाद का सिद्धांत दिया। जीवन रुपि बांस को बंसुरी का रुप देकर विश्वमैत्री का नाद फैलाया।
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